भाईश्री का जन्म गुजरात के सौराष्ट्र जिले में देवका नामक एक छोटे से गाँव में 31 अगस्त, सन् 1957 को हुआ था। इनके पिता का नाम बृजलाला कांजी भाई ओझा और माता का नाम लक्ष्मी बाई ओझा था। भाईश्री ने अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी की और कॉलेज में प्रवेश लिया। इनकी रूचि बचपन सेही धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने में रही और 13 की आयु में इन्होने श्रीमद्भागवद गीता पर अपना पहला प्रवचन दिया और 18 साल की उम्र में इन्होंने मध्य मुंबई में श्रीमद्भागवत गीता पर कथा सुनाई।
श्री रमेश भाई ओझा (भाईश्री) और भाईजी के रूप में लोकप्रिय हैं। भाईश्री, कथाकार के रूप में एक अलग ही पहचान बनाई है। पूज्य रमेश भाई ओझा जी (भाईश्री) आध्यात्मिक हिन्दू धर्मोपदेशक हैं, जो वेदान्त दर्शन पर धाराप्रवाह व्याख्यान देते हैं। उनकी रामकथा सुनने भारी संख्या में श्रोता पहुँचते हैं। गुजरात के देवका में पैदा हुए रमेश भाई ने अपनी जन्मभूमि में देवका विद्यापीठ की स्थापना की है। भाईश्री ने अपनी कथा और प्रवचनों के जरिए कोशिश की है कि लोग सर्वशक्तिमान के अस्तित्व में विश्वास करें। भाईश्री का प्रयास है कि दुनिया अपनी अच्छाई के लिए जानी जाए। श्री रमेश भाई लोगों को प्यार, अच्छाई और आध्यात्मिकता के रास्ते पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं।ख्यात संत रमेशभाई ओझा अपनी दिव्यवाणी और लोकरुचि वाली अभिव्यक्ति के लिए प्रभु प्रेमियों में आदर से सुने जाते हैं। जीवन के हर क्षेत्र पर भाईश्री का विश्लेषण अद्भुत और अनुकरणीय है। वे जीवन की समस्याओं का हल अपने प्रवचनों के माध्यम से सहजता से देते हैं। भक्ति, परमात्मा प्राप्ति और ज्ञानार्जन के विषय में उनके दिए सूत्र अद्वितीय हैं।
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