सर्दी, गर्मी या फिर कोई भी मौसम हो गले में दर्द के साथ टॉन्सिल जैसी दिक्कते हमें अक्सर महसूस होती है। ये समस्या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। इससे होने वाली परेशानी से हमारे गले में सूजन के बढ़ जाने से खाने और पीने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सही समय पर इसका सही इलाज नहीं किया गया तो यह भयंकर रूप धारण कर सकती है। यहां आज हम आपको इस बीमारी के बारे में बताने जा रहे हैं।
टॉन्सिल एक ऐसी संक्रमित बीमारी है जिसकी रोकथाम आप अपने घर में मौजूद सामग्रियों से भी कर सकती हैं। जाने इस समस्या से छुटकारा पाने के घरेलू उपचार-
टॉन्सिल क्या है और इसके होने के कारण क्या हैं?
हमारे गले के अंदर की ओर दोनों तरफ मांस की गांठ होती है। जिसे हम टॉन्सिल के नाम से जानते हैं। जब इन गाठों में बाहरी संक्रमण का असर होता है तो इनमें सूजन बढ़ने लगती है। जिसे टॉन्सिलाइटिस कहा जाता है। सूजन के बढ़ने से गले का दर्द भी बढ़ने लगता है जिससे खाना पीना भी दूभर हो जाता है। टान्सिल के बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण सर्दी गर्मी, ठंडे पानी का सेवन, खट्टी चीजों का सेवन, चावल या मैदा का ज्यादा सेवन है। इसके अलावा सर्दी लगने से, मौसम के अचानक बदल जाने से, गर्म से अचानक ठंडे में जाने या प्रदूषित वातावरण में रहने से भी टॉन्सिल जैसी समस्यायें पनपने लगती हैं। इस रोग के होने से शरीर में ठंड लगने लगती है जिसके साथ बुखार भी आ जाता है।
हमारे गले के अंदर की ओर दोनों तरफ मांस की गांठ होती है। जिसे हम टॉन्सिल के नाम से जानते हैं। जब इन गाठों में बाहरी संक्रमण का असर होता है तो इनमें सूजन बढ़ने लगती है। जिसे टॉन्सिलाइटिस कहा जाता है। सूजन के बढ़ने से गले का दर्द भी बढ़ने लगता है जिससे खाना पीना भी दूभर हो जाता है। टान्सिल के बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण सर्दी गर्मी, ठंडे पानी का सेवन, खट्टी चीजों का सेवन, चावल या मैदा का ज्यादा सेवन है। इसके अलावा सर्दी लगने से, मौसम के अचानक बदल जाने से, गर्म से अचानक ठंडे में जाने या प्रदूषित वातावरण में रहने से भी टॉन्सिल जैसी समस्यायें पनपने लगती हैं। इस रोग के होने से शरीर में ठंड लगने लगती है जिसके साथ बुखार भी आ जाता है।
गले के अंदर सूजन के बढ़ने से थूक का निगलना भी दुश्वार हो जाता है। आइए जानते हैं इस दर्द से भरे टॉन्सिलाइटिस के कुछ उपचार-
– गले की सूजन के साथ इस दर्द भरी समस्या से निजात पाने के लिये आप केले के छिलकों का उपयोग करें। इसे गले में बांधने से काफी राहत महसूस होती है।
– सूखे अंजीर का सेवन दूध में मिलाकर करने से शरीर को शक्ति मिलती है। इसी प्रकार इसे यदि पानी में उबालकर अच्छी तरह से मसलकर इसका लेप गले पर लगा लिया जाये तो ये गले की सूजन को कम कर दर्द से राहत पहुचाने का काम करती है। इससे टॉन्सिल की समस्या जल्द ही जड़ से खत्म हो जाती है।
दालचीनी एक ऐसी प्राकृतिक औषधि है जिसका उपयोग मसालों के साथ रोग संबंधी विकारों को दूर करने के लिये किया जाता है। इसकी कड़ी लकड़ियों को पीसकर इसका बारीक पाउडर बना लें। अब इसे चुटकी भर लेते हुये रोज शहद के साथ इसका सेवन करें। इसमें तुलसी के पत्ते भी
डाल सकते हैं। यह अमृतमयी औषधि आपके शरीर के लिये अमृत के समान है।
गले के दर्द से राहत पाने के लिये आप एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच अजवायन डालकर इसका गरारा करें। इससे गले के दर्द से तुरंत ही आराम महसूस होने लगेगा।
एक छोटी चम्मच पिसी हुई हल्दी में चुटकी भर पिसी हुई काली मिर्च और एक चम्म्च अदरक के रस को मिलाकर इसे गर्म कर लें। इसका सेवन रात को सोने से पहले करके सो जाये। दो दिन में ही आपको इस घरेलू दवाई के फायदे नजर आने लगेंगे।
आपके गले से राहत पहुंचाने का यह पहला प्राथमिक उपचार माना जाता है। यदि इसके बाद भी आपको राहत महसूस नहीं हो रही है तो आप अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

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